कहानी
गांबिया अफ्रीका का सबसे छोटा देश है जो सेनेगाल से तीन तरफ से घिरा हुआ है. आपने इस देश के बारे में शायद ना सुना होगा, 1994 में तख्ता पलट कर के याह्या जम्मेह इस देश के राष्ट्रपति बन गए. दिसंबर 2016 को वे चुनाव में हार गए थे. हार के बाद उन्होंने विजयी उम्मीदवार एडम बॉरो को सत्ता ट्रांसफर करने से मना कर दिया. डेढ़ महीने बाद बड़ी मुश्किल से जम्मेह को सत्ता से भगाया गया. लेकिन उस के मुआवजे में उन्होंने लग्जरी गाड़ियां और अपने लिए जिंदगी भर का सुख मांग लिया.
जब जम्मेह का काफिला गांबिया की सड़कों से निकलता था तो उनकी कार के पीछे की गाड़ियों में बैठे हुए सैनिक सड़कों पर बिस्कुट के पैकेट फेंका करते थे. जो बाल-बच्चे बिस्कुट कलेक्ट करने के लिए आते थे, कभी-कभी उनकी एक्सीडेंट से मृत्यु भी हो जाती थी. लेकिन उसके बाद भी जम्मेह का काफिला नहीं रुकता था और वह बिस्कुट के पैकेट फेंकते हुए आगे बढ़ जाते थे.
इसी तरह बिस्कुट के पैकेट हमारे देश के छुटभैये नेता भी फेका करते हैं जिसको कुछ लोग चुनावों के ठीक पहले लपक लेते हैं और एक नागरिक के तौर पर उनकी मौत हो जाती है. दिल्ली के चुनाव में भी (लगभग) फ्री बिजली, पानी और वाई-फाई के बिस्कुट फेंके गए थे. बदले में धोखा मिला.
इन चुनावों में भी राहुल ने 72,000 रुपये वाला बिस्कुट के पैकेट फेकने का लालच दिया है, सीधी सी बात यह है कि वह देश में घुसपैठियों को 6000 हज़ार रुपये महीने देकर इन लोगों के राशन पानी की व्यवस्था देश सर मढ़ने की तैयारी कर रहें हैं, 6000 रुपये महीने कोई रोजगार की व्यवस्था नही है जो कि गरीबी को स्थाई रूप से दूर कर देगी, आगे फिर से यही गरीब लालच में जनसंख्या बढ़ाएंगे, फिर इनको लालच देकर वोट बैंक की तरह प्रयोग किया जाएगा, फिर... फिर... फिर... यही क्रम चलेगा... कांग्रेस गरीबी व बेरोजगारी हटाने के लिए चिंतित नही है, वह अपना नासमझ, गरीब व असहाय वोट बैंक स्थाई रूप से बनाये रखने हेतु चिंतित है जिसको वर्तमान मोदी सरकार स्थाई रूप से गरीबी हटाकर खत्म करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस का सीधा लक्ष्य है अधिक गरीब मतलब अधिक कांग्रेसी वोट मतलब कांग्रेसी सत्ता की पुनः वापिसी की संभावना।
और यह होगा देश को कमजोर करने की कीमत पर, देश को आर्थिक व सामरिक रूप से पंगु बनाने की कीमत पर, देश को पुनः उत्पादक की जगह उपभोक्ता बनाने की कीमत पर, क्योंकि 6000 रुपये महीने से कोई रोजगार तो नही बढ़ेगा परन्तु देश के आधुनिक रक्षा, सड़क, परिवहन, चिकित्सा, विज्ञान, कृषि आदि के उन्नतिकरण का बजट जरूर इस काँग्रेसी योजना की भेंट चढ़ जाएगा। यह सोच समझकर लिखा गया एक ऐसा गणित है जिसमे देश को तोड़ने वाले लोगों को मजबूत बनाने की योजना बनाई गई है, जैसा कि आप जानते ही हैं जनसंख्या वृद्धि को अपना धार्मिक अधिकार मानने वाले कौन लोग देश के सबसे गरीब 5 करोड़ परिवार हैं। और यह वसूला किनसे जाएगा -- हम आपसे जो पिछले कई दशक से देशहित में परिवार नियोजन करके देश की उन्नति हेतु चिंतित व प्रयासरत हैं, दिया किनको जाएगा--- जो जनसंख्या बढ़ाकर देश पर व इसके संसाधनों पर कब्जे करने को चिंतित व प्रयासरत हैं । कांग्रेस ने पिछली सरकार में जो कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमो का है, ये योजना उसी का नया संस्करण है क्योंकि सीधे या बोलकर नही इस बार चुपके चुपके कांग्रेस काम पर लगी है अपने वोट बैंक के हित साधने में जिसको हम ओर आप लोग करने दे रहे हैं, कांग्रेस के बनाये भ्रमजाल में फंसकर हम लोग ही ऐसा कर रहे हैं । भारत का दलित मजदूर किसान वर्ग जो कि मनरेगा के अंतर्गत आता है वह इस योजना की परिधी से पहले ही बाहर है क्योंकि वह हर परिवार 12000 हज़ार रुपये महीना कमाता है, जिसके संसाधन मनरेगा मजदूरी, छोटी कृषि, अन्य मजदूरी सरकार के साथ EPFO & ESIC अनुबन्धन तथा डिजिटलीकरण क्रांति के बाद सरकार के पास सुरक्षित हैं । अतः आप कांग्रेस को चुनकर देश को घुसपैठिये बांग्लादेशियों व रोहिंगयाओं के लिए अरक्षित छोड़ते हो या कांग्रेस की चाल समझते हो यह आपकी बुद्धि व देश के लिए चिंता पर निर्भर करता है, निर्णय आपका भाग्य भी देश का व आपका ।
राष्ट्र की सुरक्षा, आर्थिक विकास, भ्रष्टाचार, आतंकवाद से निपटने, नदियों की सफाई, धोखे और लोभ से धर्म परिवर्तन जैसे ज्वलंतशील मुद्दों पे उनके पास देने को कुछ है ही नहीं.
जब जम्मेह का काफिला गांबिया की सड़कों से निकलता था तो उनकी कार के पीछे की गाड़ियों में बैठे हुए सैनिक सड़कों पर बिस्कुट के पैकेट फेंका करते थे. जो बाल-बच्चे बिस्कुट कलेक्ट करने के लिए आते थे, कभी-कभी उनकी एक्सीडेंट से मृत्यु भी हो जाती थी. लेकिन उसके बाद भी जम्मेह का काफिला नहीं रुकता था और वह बिस्कुट के पैकेट फेंकते हुए आगे बढ़ जाते थे.
इसी तरह बिस्कुट के पैकेट हमारे देश के छुटभैये नेता भी फेका करते हैं जिसको कुछ लोग चुनावों के ठीक पहले लपक लेते हैं और एक नागरिक के तौर पर उनकी मौत हो जाती है. दिल्ली के चुनाव में भी (लगभग) फ्री बिजली, पानी और वाई-फाई के बिस्कुट फेंके गए थे. बदले में धोखा मिला.
इन चुनावों में भी राहुल ने 72,000 रुपये वाला बिस्कुट के पैकेट फेकने का लालच दिया है, सीधी सी बात यह है कि वह देश में घुसपैठियों को 6000 हज़ार रुपये महीने देकर इन लोगों के राशन पानी की व्यवस्था देश सर मढ़ने की तैयारी कर रहें हैं, 6000 रुपये महीने कोई रोजगार की व्यवस्था नही है जो कि गरीबी को स्थाई रूप से दूर कर देगी, आगे फिर से यही गरीब लालच में जनसंख्या बढ़ाएंगे, फिर इनको लालच देकर वोट बैंक की तरह प्रयोग किया जाएगा, फिर... फिर... फिर... यही क्रम चलेगा... कांग्रेस गरीबी व बेरोजगारी हटाने के लिए चिंतित नही है, वह अपना नासमझ, गरीब व असहाय वोट बैंक स्थाई रूप से बनाये रखने हेतु चिंतित है जिसको वर्तमान मोदी सरकार स्थाई रूप से गरीबी हटाकर खत्म करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस का सीधा लक्ष्य है अधिक गरीब मतलब अधिक कांग्रेसी वोट मतलब कांग्रेसी सत्ता की पुनः वापिसी की संभावना।
और यह होगा देश को कमजोर करने की कीमत पर, देश को आर्थिक व सामरिक रूप से पंगु बनाने की कीमत पर, देश को पुनः उत्पादक की जगह उपभोक्ता बनाने की कीमत पर, क्योंकि 6000 रुपये महीने से कोई रोजगार तो नही बढ़ेगा परन्तु देश के आधुनिक रक्षा, सड़क, परिवहन, चिकित्सा, विज्ञान, कृषि आदि के उन्नतिकरण का बजट जरूर इस काँग्रेसी योजना की भेंट चढ़ जाएगा। यह सोच समझकर लिखा गया एक ऐसा गणित है जिसमे देश को तोड़ने वाले लोगों को मजबूत बनाने की योजना बनाई गई है, जैसा कि आप जानते ही हैं जनसंख्या वृद्धि को अपना धार्मिक अधिकार मानने वाले कौन लोग देश के सबसे गरीब 5 करोड़ परिवार हैं। और यह वसूला किनसे जाएगा -- हम आपसे जो पिछले कई दशक से देशहित में परिवार नियोजन करके देश की उन्नति हेतु चिंतित व प्रयासरत हैं, दिया किनको जाएगा--- जो जनसंख्या बढ़ाकर देश पर व इसके संसाधनों पर कब्जे करने को चिंतित व प्रयासरत हैं । कांग्रेस ने पिछली सरकार में जो कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमो का है, ये योजना उसी का नया संस्करण है क्योंकि सीधे या बोलकर नही इस बार चुपके चुपके कांग्रेस काम पर लगी है अपने वोट बैंक के हित साधने में जिसको हम ओर आप लोग करने दे रहे हैं, कांग्रेस के बनाये भ्रमजाल में फंसकर हम लोग ही ऐसा कर रहे हैं । भारत का दलित मजदूर किसान वर्ग जो कि मनरेगा के अंतर्गत आता है वह इस योजना की परिधी से पहले ही बाहर है क्योंकि वह हर परिवार 12000 हज़ार रुपये महीना कमाता है, जिसके संसाधन मनरेगा मजदूरी, छोटी कृषि, अन्य मजदूरी सरकार के साथ EPFO & ESIC अनुबन्धन तथा डिजिटलीकरण क्रांति के बाद सरकार के पास सुरक्षित हैं । अतः आप कांग्रेस को चुनकर देश को घुसपैठिये बांग्लादेशियों व रोहिंगयाओं के लिए अरक्षित छोड़ते हो या कांग्रेस की चाल समझते हो यह आपकी बुद्धि व देश के लिए चिंता पर निर्भर करता है, निर्णय आपका भाग्य भी देश का व आपका ।
राष्ट्र की सुरक्षा, आर्थिक विकास, भ्रष्टाचार, आतंकवाद से निपटने, नदियों की सफाई, धोखे और लोभ से धर्म परिवर्तन जैसे ज्वलंतशील मुद्दों पे उनके पास देने को कुछ है ही नहीं.
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